मोबाइल की स्क्रीन में सिमटता बचपन… और मैदानों में दौड़ता बचपन
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जैनशिल्प समाचार । सूरत
आज जरूरत है कि हमारे बच्चे सिर्फ उंगलियों से मोबाइल की स्क्रीन न चलाएं, बल्कि अपने कदमों से मैदान नापें। इसी सोच को साकार करने की एक शानदार पहल देखने को मिली सूरत के जलक्रांति मैदान में, जहाँ छत्रपति और एकलव्य क्रीड़ा मंडल द्वारा भव्य खो-खो प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में नन्हे खिलाड़ियों ने अपने जोश, जुनून और दमखम से हर किसी का दिल जीत लिया। जलक्रांति मैदान में आज मोबाइल की चमक नहीं, बल्कि बच्चों के पसीने की चमक दिखाई दी। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच अश्विनीकुमार क्षेत्र के नन्हे खिलाड़ियों ने खो-खो प्रतियोगिता में पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया।
छत्रपति क्रीड़ा मंडल पिछले 3 वर्षों से, जबकि एकलव्य क्रीड़ा मंडल पिछले 7 वर्षों से लगातार बच्चों को निःशुल्क प्रशिक्षण दे रहा है। आज जब बच्चों का बचपन मोबाइल फोन, गेम्स और स्क्रीन टाइम के बीच सिमटता जा रहा है, ऐसे समय में मैदान की ओर बढ़ता एक-एक कदम बेहद मायने रखता है। क्योंकि मोबाइल बच्चों का मनोरंजन कर सकता है, लेकिन मैदान ही उनके शरीर में ताकत, मन में आत्मविश्वास और जीवन में अनुशासन पैदा करता है। कोच यश महाजन, अंकित बाथाणी, राजवीर परमार और गोपाल तिवारी जैसे युवा प्रशिक्षक बच्चों की प्रतिभा को पहचानकर उसे तराशने में लगातार मेहनत कर रहे हैं। यह आयोजन छत्रपति क्रीड़ा मंडल, एकलव्य क्रीड़ा मंडल और समाजसेवक हरीश भाई गुर्जर के सहयोग से संपन्न हुआ। इसी उद्देश्य के साथ समाजसेवक हरीश भाई गुर्जर ने सरकार से अपील की है कि ऐसे प्रतिभाशाली बच्चों को खेल की बेहतर सुविधाएं, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन उपलब्ध कराया जाए, ताकि सूरत के इन छोटे-छोटे कदमों से देश के लिए बड़े खिलाड़ी तैयार हो सकें।


