रंगीन सूरत की संगीन रातें - सब कुछ पा लिया, पर नहीं पाया नाम, परोसा खुद को, तब मिला रोटी, कपड़ा, मकान

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रंगीन सूरत की संगीन रातें - सब कुछ पा लिया, पर नहीं पाया नाम, परोसा खुद को, तब मिला रोटी, कपड़ा, मकान

मनोहर महाजन

जरा पाने की चाहत में बहुत कुछ छूट जाता है।
न जाने सबर का धागा कहां पर टूट जाता है।
किसे हमराह कहते हो यहां तो अपना साया भी कही पर साथ रहता है कही पर छूट जाता है।

कहते हैं कि, जमीन और जोह आफत को न्योता देते हैं। लेकिन आज के सामाजिक जीवन में सबसे ज्यादा जरूरत की चीजें इंसान के लिए रोटी, कपड़ा और मकान है। हालांकि इन तीनों चीजों के लिए इंसान को रात-दिन पसीना बहाकर दो वक्त की रोटी, रहने के लिए एक मकान और पहनने के लिए कपड़ा मिलता है। लेकिन कभी-कभी यह तीनों चीजें किसी इंसान के नसीब में तब होती है, जब वह रास्ता भटक जाए और भटके रास्ते पर उसे इन तीनों की जरूरतें खुश नसीबी समझो या उनकी बदनसीबी लेकिन उन्हें मिली यह सफलता काफी कुछ दिखा जाती है। शायद यही सफलता मिलने के बाद भी लोगों की नजरों में पायल की जिन्दगी किसी गिरी हुई औरत के समान है। क्योंकि यह तीनों चीजें पायल के नसीब में तो है, लेकिन उसने किस तरह से यह चीजें हासिल की है, इसके चर्चे सरेआम लोगों की जुबान पर हैं। पायल की सच्ची कहानी इस प्रकार है।

महाराष्ट्र के जलगांव जिले में रहने वाले गोपाल 15 साल पहले सूरत में रोजी रोटी तलाशने आया था। मिल में, पावरलूम कारखाने में काम करते-करते गोपाल टेम्पो चलाने लगा। धीरे-धीरे टेम्पो लेकर वह चार पहिया वाहन चलाने लगा। इस दौरान परिजनों ने उसकी शादी समाज की ही लड़की पायल के साथ कर दी। पायल को लेकर गोपाल फिर से सूरत आने के बाद किराये के मकान में रहने लगा। हालांकि उस वक्त शहर के पांडेसरा, वेड रोड, क्षेत्र में लकड़ के कच्चे मकान ज्यादा होने से पायल को पहले से ही इस तरह का मकान पसंद नहीं था। दूसरी तरफ गोपाल सीधा-सादा दिखाई देने से वह कपड़े भी मैले पहनता था, जिससे कई मनचले युवक पायल को कहते थे कि, यह ‘गंवार’ तुझे कैसे पसंद आ गया? लेकिन उस वक्त पायल कुछ कह नहीं पाती थी। धीरे-धीरे कर उसे तो संतान हो गई।

दो बच्चों की माँ होने के बावजूद पायल पहले से ज्यादा खूबसूरत दिखाई देने लगी। पहले से ही तीखे नैन नक्श वाली पायल की खूबसूरती और अधिक खिलने लगी। गोपाल समाज-से सलाह के लिए वाहन पर टूर के लिए जाने से पायल घर में अकेली बच्चों के साथ रहती थी। गोपाल जब भी घर लौटता, कुछ पैसे वह पायल को देकर चले जाता। हालांकि इन पैसों में पायल का बच्चों के साथ गुजारा नहीं होता, एक तरफ बच्चों को पसंद का खाना नहीं मिलता। दूसरी तरफ दो-दो तीन-तीन माह मकान मालिक को किराया नहीं दे पाती, जिससे मकान मालिक भी उसे भरा बुरा कहती, लेकिन पायल के पास दूसरा कोई रास्ता नहीं था।

ऐसे में कुछ साल पहले प्रधानमंत्री आवास योजना स्कीम आने के बाद उसे मनोज नामक युवक ने कहा कि, तुम इसमें फार्म भर दो, तुम्हारा मकान लग जायेगा। हालांकि पायल का पति गोपाल रात दिन वाहनों पर घूमते रहने से एक-एक सप्ताह तक वह घर नहीं लौटता था। जिससे पायल ने मनोज के कहने पर उसके जरिये ही मकान के लिए फार्म भर दिया। मनोज क्षेत्र में तथा सब्जी मंडी में आलू बेचने का काम करता था, जिससे उसकी मनपा के अधिकारियों से पहचान थी। धीरे-धीरे कर मनोज ने पायल को अपनी और आकर्षित कर लिया। पायल के साथ वह फिल्में देखने, होटल में खाना खाने जाने लगा। मीठा देखकर एक दिन मनोज ने आखिर पायल का पक्ष छोते ही अलग कर ही दिया। उस तक पायल यह भी भूल गई कि, वह शादी शुदा है और दो बच्चों की माँ है। चालाक मनोज ने उस दिन पायल को पूरी तरह अपने वश में कर लिया। धीरे-धीरे मनोज अब गोपाल की गैर मौजूदगी में पायल के घर में ही रहने लगा। आवास में घर मिलने की आस में पायल ने खुद को मनोज को सौंप दिया था। इधर मनोज ने भी इसका भरपूर फायदा उठाया और बताया जाता है कि, उसने मनपा के ही किसी अधिकारी के सामने पायल पेश कर दिया। पति के बाद मनोज और उसके बाद अधिकारी को तर्ते रंगीन करने लगी। पायल अब खुले तौर पर समाज में बदनाम होने से नहीं डर रही थी।

एक तरफ उसका आवास में मकान भी लग गया, दूसरी तरफ अब उसके पास मोपेड आ गई है। जब वह मोपेड पर घूमती है तो उसकी झलक देखने के लिए मनचले युवकों की आंखें चौंधिया जाती हैं। एक तरफ सालों पहले रोटी कपड़ा और मकान के लिए तरसने वाली पायल के पास अब महंगे कपड़े, मकान और खाने के लिए अच्छे-अच्छे व्यंजन मिलने लगे हैं। जिस मनोज ने उसे घंटों के दुलदुल में रंगा पना किया था, उसी को अब वह दुत्कारने लगी है। जिससे मनोज तिलमिलाकर रह जाता है। शायद के अड्डे पर, चौथे पर वह दोस्तों से यही कहता है कि, पायल को पीछे वाली बनाने में उसका काफी योगदान है, वह कई बार पायल से मिलने का प्रयास भी करता है, लेकिन पायल उसे घास नहीं डालती।

पायल की अच्छी खासी जिन्दगी देखकर मनोज ने उस पर शोखाबाजी का मामला दर्ज कर दिया। हालांकि उसका कालीकाली उसी के गले पड़ गया। पायल ने अपने हुस्न के जाल में एक पुलिस वाले को ऐसा अंधा कर दिया कि, वह भी पायल का साथ देने हेतु उल्टे मनोज को ही जेल में बंद करने की धमकी देने लगा। जिससे मनोज ने पायल से दूर रहना ही मुनासिब समझा। कुछ दिनों तक पुलिस वाले के आगे पीछे गिराने वाली पायल का उससे भी मन भर जाने पर अब उसने एक बिल्डर को अपने जाल में फांस लिया है।

बताया जाता है कि, पायल ने अपने सीधे-साधे पति गोपाल के भोलेपन का फायदा उठाकर उसे ही बिल्डर की कार में चालक के तौर पर नौकरी पर लगवा दिया। बिल्डर के कामकाज के लिए वह सुबह से ही साईट पर चले जाता है। इधर पायल अब मनोज, मनपा अधिकारी, पुलिस वाला को छोड़कर अब बिल्डर का बिस्तर गर्म कर रही है। हालांकि उसकी इस जिन्दगी में काफी उतार-चढ़ाव आने लगे हैं। लोग उससे कतराने लगे हैं, वहीं तक कि उसके रिश्तेदार भी उसके घर आने-जाने में अपनी बदनामी महसूस करने लगे हैं।

रंगीन सूरत की संगीन रातों में सवाल यह उठता है कि, क्या इंसान को जीने के लिए रोटी, कपड़ा और मकान के लिए इतना नीचे गिरना पड़ता है? क्या वह अपनी मर्यादा दांव पर लगा देता है। खासकर महिला की मर्यादा। जब पति दो वक्त का रूखा-सूखा खाना खिला सकता है तो क्या वह पति का धर्म निभाने वाली पत्नी को काफी नहीं है? शायद इसका जवाब पायल के अलावा कौन दे सकता है।

नोट :- पात्रों के नाम एवं जगह बदल दी गई है।